असम चुनाव से पहले हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा ऐलान भूमि अतिक्रमण पर सख्ती

असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बाजाली में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए बड़ा चुनावी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में भारतीय जनता पार्टी फिर से सत्ता में आती है तो सरकार सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अभियान को और तेज करेगी। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में सरकार ने जमीन अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं और अब इस अभियान को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य की भूमि और पहचान की रक्षा करना है।
पांच लाख बिघा जमीन मुक्त करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने रैली में स्पष्ट किया कि आने वाले पांच वर्षों में सरकार का लक्ष्य पांच लाख बिघा सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना है। उन्होंने बताया कि पिछले कार्यकाल में लगभग डेढ़ लाख बिघा जमीन को अतिक्रमण से खाली कराया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान केवल जमीन खाली कराने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों के अधिकारों को सुरक्षित करना भी है। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह संकेत दिया कि सरकार अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ सख्ती जारी रखेगी और इस मुद्दे को चुनावी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएगी।

पहचान और भूमि अधिकार को लेकर सख्त रुख
हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने संबोधन में ‘जति माटी और भेटी’ के सिद्धांत को दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य की पहचान भूमि और मूल निवासियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल स्थानीय और आदिवासी लोगों को ही भूमि अधिकारों में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे तत्वों के कारण राज्य की सामाजिक संरचना पर असर पड़ता है। उनके अनुसार सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में रहने वाले मूल निवासियों के हितों की रक्षा की जाए और किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस पर हमला और चुनावी रणनीति
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और उसके प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने गोगोई के ग्रेटर असम के विचार को अस्वीकार करते हुए कहा कि इस तरह की सोच राज्य की पहचान के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा एक विशेष समुदाय को प्राथमिकता दी है और इससे स्थानीय लोगों के हित प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने असम गण परिषद के उम्मीदवारों के समर्थन की अपील भी की और भाजपा गठबंधन को मजबूत बताया। राज्य में 9 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को मतगणना की जाएगी। यह चुनाव भूमि अधिकार और पहचान जैसे मुद्दों पर केंद्रित होता दिखाई दे रहा है।